लाख जमाने भर की *डिग्रीयाँ* हो हमारे पास *अपनों* की तकलीफ़ नहीं पढ़ पाये तो *अनपढ़* है हम
लाख जमाने भर की
*डिग्रीयाँ* हो हमारे पास
*अपनों* की तकलीफ़
नहीं पढ़ पाये तो *अनपढ़* है हम
अकेले ही लड़नी होती है, जिंदगी की लड़ाई क्योंकि लोग सिर्फ तसल्ली देते है साथ नही।
“ सही शिक्षक” और “सही सड़क”
दोनों एक जैसे होते हैं
खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं
मगर दुसरो को उनकी
मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं!
*चूहा अगर पत्थर का हो तो*
*सब उसे पूजते हैं*
*मगर जिन्दा हो तो मारे बिना*
*चैन नहीं लेते हैं*
*साँप अगर पत्थर का हो*
*तो सब उसे पूजते हैं*
*मगर जिन्दा हो तो उसी वक़्त*
*मार देते हैं*
*माँ बाप अगर "तस्वीरों" में हो*
*तो सब पूजते हैं*
*मगर जिन्दा है तो कीमत नहीं*
*समझते"*
*बस यही समझ नहीं आता के*
*ज़िन्दगी से इतनी नफरत क्यों*
*और*
*पत्थरों से इतनी मोहब्बत क्यों*
*जिस तरह लोग मुर्दे इंसान को*
*कंधा देना पुण्य समझते हैं*
*काश" इस तरह' ज़िन्दा" इंसान*
*को सहारा देंना पुण्य समझने*
*लगे तो ज़िन्दगी आसान हो*
*जायेगी*
*एक बार जरूर सोचिए*
सुपर सुविचार
*"क्षमा "उन फूलों के समान हैं जो कुचले जाने के बाद भी "खुशबू "देना बंद नहीं करते* ......
*हमेशा खुश*
*रहना चाहिए,*
*क्योंकि*
*परेशान होने से*
*कल की मुश्किल*
*दूर नहीं होती*
*बल्कि....*
*आज का सुकून*
*भी चला जाता*
*है !!*
















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